गुजरात के सोमनाथ में देशभर के 15 राज्यों से पहुंचे संत-महंत और प्रतिनिधि, नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन
सोमनाथ, गुजरात | 29 जुलाई 2026
भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव की पावन धरा पर अखिल भारतीय गोस्वामी सभा, दिल्ली (रजि.) की वार्षिक राष्ट्रीय बैठक गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के लगभग 15 राज्यों से संत-महंत, पदाधिकारी एवं गोस्वामी समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में संगठन की मजबूती, सामाजिक समरसता, सेवा कार्यों के विस्तार और सनातन संस्कृति के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की गई।
नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का हुआ गठन
बैठक के दौरान सर्वसम्मति से महंत बालकृष्ण पर्वत जी को पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। वहीं बहन उत्कर्षा गिरि जी को दोबारा राष्ट्रीय महिला अध्यक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसके अलावा—
- जानकीलाल गोस्वामी – कार्यकारिणी अध्यक्ष
- श्री महंत प्रीतम पुरी – कार्यकारी अध्यक्ष
- ए.जी. अन्ना गोस्वामी – महामंत्री
का भी सर्वसम्मति से चयन किया गया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का प्रतिनिधियों ने पुष्पमालाओं और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।
संगठन, सेवा और सामाजिक समरसता पर विशेष जोर
सम्मेलन में समाज के संगठनात्मक विस्तार, युवाओं की भागीदारी, शिक्षा, सेवा और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि समाज की एकजुटता और संगठन ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है तथा आने वाले समय में समाजहित के कार्यों को और गति दी जाएगी।
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुआ आयोजन
बैठक के दौरान भगवान सोमनाथ महादेव की साक्षी में ध्वज परिवर्तन, वैदिक मंत्रोच्चार एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। संत-महंतों ने समाज में संस्कार, सेवा और सनातन परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया।
स्थानीय गोस्वामी समाज की व्यवस्थाओं की सराहना
सम्मेलन में देशभर से आए प्रतिनिधियों के लिए आवास, भोजन और अन्य व्यवस्थाएँ गुजरात के स्थानीय गोस्वामी समाज द्वारा की गईं। विशेष रूप से श्री प्रेमनारायण लक्ष्मण गिरि एवं श्री के.के. गोस्वामी के नेतृत्व में की गई व्यवस्थाओं की सभी अतिथियों ने सराहना की।
समाज की एकता के संकल्प के साथ हुआ समापन
आयोजकों ने कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन पूरे देश के गोस्वामी समाज को एक मंच पर जोड़ने वाला महत्वपूर्ण आयोजन साबित हुआ। कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, संगठन, सेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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