दतिया। मध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 का इंतजार खत्म हो गया है। निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। जारी कार्यक्रम के अनुसार 30 जुलाई 2026 को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त 2026 को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। पूरी चुनाव प्रक्रिया 4 अगस्त तक समाप्त कर दी जाएगी।
चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही दतिया विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। मतदान सभी केंद्रों पर ईवीएम (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) मशीनों के माध्यम से कराया जाएगा।
दतिया उपचुनाव 2026 का पूरा चुनाव कार्यक्रम
| कार्यक्रम | तिथि |
|---|---|
| अधिसूचना जारी | 6 जुलाई 2026 |
| नामांकन की अंतिम तिथि | 13 जुलाई 2026 |
| नामांकन पत्रों की जांच | 14 जुलाई 2026 |
| नाम वापस लेने की अंतिम तिथि | 16 जुलाई 2026 |
| मतदान | 30 जुलाई 2026 |
| मतगणना | 3 अगस्त 2026 |
| चुनाव प्रक्रिया पूर्ण | 4 अगस्त 2026 |
क्यों हो रहा है दतिया विधानसभा उपचुनाव?
दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद रिक्त हुई थी।
दरअसल, बैंक एफडी फर्जीवाड़े से जुड़े करीब 28 वर्ष पुराने मामले में अदालत ने राजेंद्र भारती को 3 वर्ष की सजा सुनाई थी। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3), संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) और सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस बनाम भारत संघ फैसले के तहत दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलने पर विधायक की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है।
इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने 2 अप्रैल 2026 से उनकी सदस्यता समाप्त करते हुए दतिया विधानसभा सीट रिक्त घोषित कर दी थी।
क्या था बैंक एफडी फर्जीवाड़ा मामला?
मामले की शुरुआत वर्ष 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक से हुई थी।
आरोप था कि बैंक के रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी कर एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई। इसी आधार पर 1999 से 2011 के बीच ब्याज की राशि निकाली जाती रही।
उस समय राजेंद्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के ट्रस्टी थे। जांच के बाद मामला अदालत पहुंचा और 1 अप्रैल 2026 को उन्हें दोषी करार दिया गया। अगले दिन अदालत ने 3 वर्ष के कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पिछला चुनाव: नरोत्तम मिश्रा कैसे हार गए?
दतिया विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से हराया था।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस हार के पीछे कई कारण रहे—
- बसई क्षेत्र में भाजपा को अपेक्षित बढ़त नहीं मिल सकी।
- संगठन के भीतर कथित भीतरघात की चर्चा रही।
- कार्यकर्ताओं में ओवर कॉन्फिडेंस देखा गया।
- स्थानीय मुद्दों पर जनता की नाराजगी भी सामने आई।
ढाई साल के कार्यकाल पर क्या रही जनता की राय?
राजेंद्र भारती के कार्यकाल को लेकर क्षेत्र में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
कुछ लोगों का कहना है कि विधायक जनता से पर्याप्त संपर्क नहीं रख पाए, जबकि कांग्रेस का दावा है कि प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने विधायक निधि से कई विकास कार्य कराए।
उपचुनाव में कौन-कौन हैं प्रमुख दावेदार?
1. भाजपा: नरोत्तम मिश्रा फिर हो सकते हैं उम्मीदवार
पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे सामाजिक सम्मेलनों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा इस बार पिछली चुनावी गलतियों को सुधारने का दावा कर रही है।
2. कांग्रेस में टिकट को लेकर खींचतान
कांग्रेस में टिकट को लेकर कई नाम चर्चा में हैं।
- अनुज भारती
- अवधेश नायक
- घनश्याम सिंह
हालांकि पार्टी का कहना है कि उम्मीदवार का चयन सर्वे और संगठन की राय के आधार पर किया जाएगा।
3. आजाद समाज पार्टी भी बना सकती है मुकाबला त्रिकोणीय
आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव भी लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी मौजूदगी कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।
जातीय समीकरण बन सकते हैं निर्णायक
विश्लेषकों के अनुसार इस उपचुनाव में जातिगत समीकरण अहम भूमिका निभा सकते हैं।
- यादव मतदाता: लगभग 18 हजार
- कुशवाहा मतदाता: लगभग 37 हजार
- ब्राह्मण मतदाता: लगभग 35 हजार
यदि इन वर्गों का मतदान एकतरफा नहीं हुआ तो मुकाबला बेहद रोचक हो सकता है।
क्या होगा इस उपचुनाव का असर?
दतिया उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे मध्य प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण राजनीतिक मुकाबला माना जा रहा है।
एक ओर भाजपा 2023 की हार का बदला लेना चाहेगी, वहीं कांग्रेस इस सीट को बचाने की कोशिश करेगी। ऐसे में 30 जुलाई को होने वाला मतदान और 3 अगस्त को आने वाला परिणाम पूरे प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

