चार धाम यात्रा के लिए सीमित संख्या की नीति बनाए सरकार - शंकराचार्य


 देहरादून। गंगोत्री यमुनोत्री के कपाट खुलने बाद अब केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलने वाले हैं। सनातन परंपरा है की बद्रीनाथ और केदारनाथ के कपाट खुलने पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य वहां मौजूद होते हैं। इसी परंपरा का निर्वाह करने के लिए आज ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती हरिद्वार से रवाना हुए।

 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जोशीमठ आपदा के बाद सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर अपनी नाराजगी दिखाई। साथ ही यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सीमित संख्या को लेकर नीति बनाने की बात करी तो वहीं भारत की बढ़ती जनसंख्या और अतीक अहमद और उसके भाई के हत्याकांड को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।


ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि हमारी पुरानी परंपरा रही है की जब केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खोले जाते हैं शंकराचार्य वहां मौजूद होते हैं। इसी परंपरा को मेरे द्वारा निभाया जा रहा है। जोशीमठ आपदा के बाद सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा जोशीमठ आपदा के बाद जो समस्या उत्पन्न हुई सरकार को तुरंत इसपर कार्य करना चाहिए था जो अभी तक देखने को नहीं मिला है। साथ ही चार धाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी निर्धारित होनी चाहिए इसके लिए सरकार को नीति बनानी होगी।


मंदिर एक्ट का ध्यान रखें

बद्रीनाथ केदारनाथ में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति का 1939 में एक्ट बना है। जिसमें कई बार संशोधन भी किया गया। इसी के आधार पर बद्रीनाथ केदारनाथ की व्यवस्था की जाती है एक्ट में लिखा है की मंदिर के किसी भी कार्यों में गैर हिंदू शामिल नहीं हो सकता इसपर ध्यान देने की जरूरत है।

जनसंख्या का सदुपयोग हो

जनसंख्या बढ़ने के मामले में भारत चाइना से भी आगे निकल रहा है इसको लेकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि जनसंख्या बढ़ने से मानव संसाधन कमजोर हो रहा है। जनसंख्या अगर बढ़ रही है तो सरकार को जनसंख्या का सदुपयोग करना आना चाहिए। जब घोषणा होती है की भारत जनसंख्या के मामले पर पहले नंबर पर आ गया है। हमारे पास 80 करोड लोग प्रशिक्षित हैं मगर भारत नहीं बोल पाता हमारे पास 100 करोड प्रशिक्षित लोग हैं जो हर कार्य करने में सक्षम है । भारत का अभी इस तरफ ध्यान नहीं है भारत सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।


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