ग्वालियर: स्व के भाव को ध्यान में रखकर बनाई जाएं आर्थिक नीति- डॉ महिंद्रा



प्रज्ञा-प्रवाह द्वारा, मेरी दृष्टि में भारत की अर्थव्यवस्था एवं वैश्विक परिदृश्य विषय पर डॉ भीमराव अंबेडकर पॉलीटेक्निक महाविद्यालय ग्वालियर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम का आयोजन 'स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर' श्रृंखला के अंतर्गत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ नीलम महिंद्रा जी, स्वतंत्र लेखिका द्वारा की गई एवं मुख्य वक्ता श्री अरूण डागा जी, चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे।


डॉ नीलम महिंद्रा जी ने देश की युवा आबादी को बौद्धिक संपदा में परिवर्तित कर भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि औपनिवेशिक काल के दौरान अर्थव्यवस्था में स्व का भाव नहीं था और उन्होंने नवीन आर्थिक नीतियों में स्व के भाव को ध्यान में रखने का सुझाव दिया।


श्री अरूण डागा जी ने बताया कि किस तरह अन्य देशों का निवेश भारत में बढ़ रहा है जिससे देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। उन्होंने विभिन्न आयामों में भारतीय अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत किए और बताया कि G-20 की अध्यक्षता भारत को मिलना वैश्विक परिदृश्य पर भारतीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ होने का प्रतीक है। 


स्वदेशी जागरण मंच के श्री संजीव गोयल जी ने सर्वे भवन्तु सुखिन: के संदेश के माध्यम से बताया कि भारत ही एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जो समूचे विश्व के कल्याण की कामना करता है और उस हेतु प्रयास करता है। 


श्री हरेंद्र जी ने बताया कि प्राचीन भारत की अर्थव्यवस्था बेहद सुदृढ़ थी और किस प्रकार औपनिवेशिक काल ने हमारी सुदृढ़ अर्थव्यवस्था को कमजोर किया।


श्री राजकिशोर जी, पूर्व प्रांत सह संयोजक, ने जीडीपी के नवीन मापदंडों पर विचार व्यक्त किए एवं स्थानीय उत्पादों के अधिक उपयोग से स्व को प्राप्त करने का सुझाव दिया। 


कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ व्याख्याता श्री मदन भार्गव जी द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत सह संयोजक अजय जैन जी, डॉ निधि पांडे जी, शोध आयाम से रामकृष्ण उपाध्याय, ग्राहक पंचायत से भागवत जी एवं अन्य प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

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