जासूसी के शक में 3.5 साल पाकिस्तान में काटी सजा:आज अपने घर लौटेगा खंडवा का राजू; बेटे की आवाज सुन मां-पिता के छलके आंसू

मध्यप्रदेश के खंडवा का युवक पांच साल पहले पाकिस्तान पहुंच गया। पाक पुलिस ने उसे जासूसी के आरोप में पकड़ा। इंटेलिजेंस को सौंप दिया। पाकिस्तान की मीडिया ने उसे जासूस करार दे दिया। फिर क्या था, वहां की सरकार ने जासूस साबित करने के लिए साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिए। आखिरकार, पाक सरकार ने जासूस की संदेह में गिरफ्तार राजू पर अवैधानिक तरीके से बॉर्डर पार करने का मुकदमा चलाया। वहां कोर्ट ने उसे सजा सुनाई। करीब साढ़े तीन साल तक जेल में भी रहा।

सजा पूरी होने के बाद पाक सरकार ने भारत के विदेश मंत्रालय को राजू की रिहाई के संबंध में जानकारी दी। विदेश मंत्रालय से यह जानकारी खंडवा पुलिस को मिली। 14 फरवरी को पाकिस्तान पुलिस ने राजू को अटारी बॉर्डर से भारत के हवाले किया। फिलहाल, राजू अमृतसर स्थित रेडक्रॉस सोसायटी की देखरेख में है। खंडवा पुलिस की टीम भी अमृतसर पहुंच गई है। वह मंगलवार रात तक राजू को लेकर वापस आ जाएगी। इसके बाद राजू को परिजन के सुपुर्द कर दिया जाएगा। साढ़े तीन साल से ज्यादा समय बाद राजू घर पहुंचेगा। राजू कैसे पाकिस्तान पहुंचा? साढ़े तीन साल तक परिवार के लोगों ने क्या-क्या संघर्ष किए? पढ़िए पूरी कहानी।

31 जुलाई 2019, पुलिस ने जासूसी के आरोप में पकड़ा

राजू को पाकिस्तान पुलिस ने जासूसी के आरोप में पकड़ा था।
राजू को पाकिस्तान पुलिस ने जासूसी के आरोप में पकड़ा था।

घटना, 31 जुलाई 2019 की है। राजू को पाकिस्तान पुलिस ने डेरा गाजी खान जिले में जासूसी के आरोप में पकड़ा। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने राजू से पूछताछ की। राजू ने खुद को भारत के मध्य प्रदेश, जिला खंडवा के गांव इंधावड़ी का रहने वाला बताया। पहले तो उसे पाकिस्तान पुलिस राजस्थान का रहने वाला समझ रही थी। चार दिन बाद यानी 3 अगस्त को भारतीय एजेंसियों को पता चला कि राजू खंडवा जिले के इंधावड़ी गांव का रहने वाला है। तहकीकात में राजू की पहचान खंडवा के नर्मदानगर थाना क्षेत्र के गांव इंधावड़ी निवासी भील परिवार से हुई।

राजू के छोटे भाई दिलीप ने खुफिया पुलिस से दावा किया कि यह उसका भाई राजू है, जो 15 साल से विक्षिप्त की तरह इधर-उधर घूम रहा है। वह पाकिस्तान कैसे पहुंच गया, नहीं पता। 17 फरवरी 2023 को खंडवा पुलिस ने राजू के परिवार को सूचना दी। कहा कि आपका बेटा लौट आया है, उसे लेने पंजाब जाना होगा। गाड़ी की व्यवस्था कर लीजिए। फिर गरीब परिवार ने कलेक्टर-एसपी से वाहन व्यवस्था की गुहार लगाई। कलेक्टर अनूपसिंह ने चार सदस्यीय दल गठित कर राजू को लेने भेजा। 18 फरवरी को प्रशासनिक अमले के साथ राजू का भाई दिलीप भी गया है।

3.5 साल बाद मां ने सुनी बेटे की आवाज, आंखों में आंसू

जनप्रतिनिधि की मदद से राजू की मां बसंताबाई, उसके पिता लक्ष्मण पिंडारे एडीएम ऑफिस पहुंचे। यहां पहुंचकर एडीएम शंकरलाल सिंघाड़े को पूरी बात बताई।
जनप्रतिनिधि की मदद से राजू की मां बसंताबाई, उसके पिता लक्ष्मण पिंडारे एडीएम ऑफिस पहुंचे। यहां पहुंचकर एडीएम शंकरलाल सिंघाड़े को पूरी बात बताई।

पाकिस्तान से रिहाई के बाद खंडवा पुलिस ने राजू से उसकी मां बसंता बाई और पिता लक्ष्मण पिंडारे से बात कराई। राजू ने पिता से पूछा पापा कैसे हो?, मैं वापस लौट आया हूं। बेटे की साढ़े तीन साल बाद आवाज सुनकर माता-पिता के आंखों के आंसू आ गए। राजू से पिता लक्ष्मण बोले- मैं जल्द ही तुम्हें लेने के लिए व्यवस्था करके आ रहा हूं। बेटे के अमृतसर सकुशल मिलने की सूचना के बाद लक्ष्मण सहित परिवार ने राहत की सांस ली। इधर, पिता लक्ष्मण का कहना है कि बेटा 2019 में घर से कहीं चला गया था।

तीन महीने बाद प्रशासन की ओर से जानकारी मिली थी कि तुम्हारा बेटा भारत बॉर्डर पार करके पाकिस्तान चला गया। जहां पर उसे पुलिस ने पकड़ा है। बेटे के पाकिस्तान में होने की सूचना के बाद हम लोगों के होश उड़ गए थे। राजू की मां बसंता बाई ने बताया कि उनका बेटा मानसिक रूप से कमजोर है। वह इधर-उधर घूमता रहता है। वह पाकिस्तान कैसे पहुंच गया, उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता।

उन्होंने कहा कि जो दो रोटी कमाकर नहीं खा सकता, वह जासूसी क्या खाक करेगा। राजू पर जासूस होने का झूठा इल्जाम लगाया जा रहा है। सितंबर 2022 में मां ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी गुहार लगाई थी कि उनके बेटे को वापस लाया जाए। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट करके विदेश मंत्रालय से राजू की रिहाई को लेकर मदद मांगी थी। हालांकि, इसके बाद भी न विदेश मंत्रालय ने ध्यान दिया और न ही गृह मंत्रालय ने।

राजू भील का परिवार खेतिहर मजदूरी करता है

राजू के पिता लक्ष्मण भील की गांव में तीन एकड़ जमीन है, जिसकी उपज से बमुश्किल गुजारा होता है। इस वजह से उनके परिवार को मजदूरी करने जाना पड़ता है। राजू के पिता लक्ष्मण ने बताया कि उनके दो बेटे और एक बेटी है। बड़े लड़के का नाम राजू है। लक्ष्मण ने बताया कि उनका बेटा पता नहीं कैसे पाकिस्तान चला गया। बेटे को पाकिस्तानी जेल में बंद हुए करीब साढ़े तीन साल से ज्यादा समय हो गया है।

भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी से मिलने गए थे

मां-बाप का कहना है कि बेटे की सलामती के साथ घर वापसी के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ ही कलेक्टर-एसपी से मिले। कई बार जनसुनवाई में भी आवेदन दिया। पिछले दिनों भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने के लिए सनावद-मोरटक्का भी गया था, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। मेरा बेटा जैसा भी है, हमारे सामने तो रहेगा। वह मेरे दो बेटे और एक बेटी में सबसे बड़ा है। मानसिक हालत ठीक न होने के कारण उसकी पत्नी घर से चली गई थी। चर्चा है कि राजू की मानसिक स्थिति उस समय ठीक नहीं थी। संभवतः इसी कारण वह गलती से पाकिस्तान की सीमा में चला गया था।

पाक ने बॉर्डर क्रॉस करना अवैधानिक माना, सजा के बाद दी रिहाई

खंडवा एसपी विवेक सिंह का कहना है कि राजू को लेकर कई दफा इंटेलिजेंस ने इनपुट मांगा था। क्योंकि, वह खंडवा का रहने वाला है और यहां के नर्मदानगर थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज थी। राजू के मां-बाप ने कई बार बेटे की रिहाई के लिए आवेदन दिया। उनकी बात हमने जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ कार्यालय के माध्यम से विदेश मंत्रालय तक पहुंचाई थी। हम क्लियर कर चुके थे कि पाकिस्तान पुलिस जिस राजू को जासूस मान रही है, वह मानसिक विक्षिप्त है।

राजू को ढूंढने परिवार ने बैंक से 80 हजार रु. का कर्ज लिया

राजू के माता-पिता ने बताया, मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने से राजू अक्सर कहीं भी चला जाता था। महीने-पंद्रह दिन में लौट भी आता था। पांच साल पहले गया तो एक-दो महीने इंतजार के बाद तलाश शुरू की। बैंक से 80 हजार रुपए का कर्ज लेकर कई जगह ढूंढा, लेकिन नहीं मिला। इस बीच एक दिन दो पुलिसवाले घर आए और राजू का फोटो दिखाकर पूछताछ की। उन्होंने बताया कि राजू अब पाकिस्तान पहुंच गया है। तब लगा अब राजू को जिंदा देख पाएंगे या नहीं। राजू की घर वापसी के लिए इधावड़ी के देवेंद्रसिंह सोलंकी ने तत्कालीन सांसद नंदकुमार सिंह चौहान, खरगोन सांसद गजेंद्रसिंह पटेल और मांधाता विधायक नारायण पटेल (तब कांग्रेस में थे) से निवेदन कर राजू को लौटाने का आग्रह किया था, लेकिन इन सब से कुछ नहीं हो सका। आखिरकार, सजा पूरी करने के बाद ही मंगलवार को राजू परिवार के बीच होगा।

राजू को पेंशन देंगे, जो मदद कर सकते हैं करेंगे

पुनासा एसडीएम चंदरसिंह सोलंकी ने बताया, 16 फरवरी को सूचना प्राप्त होते ही पटवारी, कोटवार और स्थानीय जनप्रतिनिधि को राजू के माता-पिता के पास भेजा और उसे लाने की प्रक्रिया शुरू की। राजू के आने पर हम उससे जरूर मिलेंगे। राजू की तलाश में परिजन ने बैंक से कर्ज लिया है। इसकी अदायगी में क्या छूट मिल सकती है, इसके लिए बात करेंगे। राजू को विकलांग पेंशन और अन्य सुविधा दिलाने का प्रयास करेंगे।

source - Dainik Bhaskar

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