मप्र के पुराने पड़ोसी राज्य कर्नाटक में 10 मई को विधानसभा के चुनाव हैं। यह चुनाव कर्नाटक में सरकार के साथ साथ मप्र की सियासी रणनीति भी तय करेंगे। यही वजह है कि एमपी के बीजेपी और कांग्रेस के कई नेता इन दिनों कर्नाटक अलग अलग इलाकों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
जहां एक ओर बीजेपी के कई बड़े दिग्गज नेता कर्नाटक में चुनावी दौरे पर हैं। वहीं कांग्रेस ने बाला बच्चन, जीतू पटवारी, उमंग सिंघार को भेजा है। फिलहाल एमपी के चुनाव पर फोकस कर रही कांग्रेस को कर्नाटक में राहुल गांधी से काफी उम्मीदें हैं।
सियासी मिजाज एक जैसा
कर्नाटक और मप्र का सियासी मिजाज और जनमानस लगभग एक जैसा ही है। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के बनने के पहले दोनों एक दूसरे के पड़ोसी रहे हैं। ज़ाहिर है मप्र में चुनाव की फायनल रणनीति कर्नाटक की सफलता और विफलता पर ही निर्भर करेगी। ऐसे मे देखना होगा कि कर्नाटक के चुनावी परिणाम का एमपी की सियासत पर कितना असर होगा।
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