दोस्त के कहने पर बन रहा लड़की...:हार्मोंस चेंज के लिए ले रहा दवाई

राजधानी में एक अनूठा मामला सामने आया है। एक युवक अपने हमउम्र दोस्त को अपने पिछले जन्म की प्रेमिका मानता है। लड़की बनाने के लिए उसने दोस्त को फीमेल हार्मोंस की दवाई लेने की सलाह दी तो वह आठ से अधिक बार हार्मोनल थैरेपी ले चुका है। फीमेल हार्मोंस लेने से जब लड़के के व्यवहार में परिवर्तन आने लगा तो परिजन को शंका हुई।

उन्होंने इस संबंध में जब बेटे के दोस्त से बातचीत की तो पता चला कि वह उनके बेटे को अपनी गर्लफ्रेंड मानता है और कहता है कि उसे पाने के लिए कुछ भी करेगा। यह भी सामने आया कि हार्मोंस थैरेपी की खातिर वो उनके बेटे पर 80 हजार रुपए भी खर्च कर चुका है। अब पिता बेटे के दोस्त और उसके परिजन के खिलाफ केस दर्ज कराना चाहते हैं। पिता ने जिला कोर्ट में गुहार लगाने की तैयारी कर ली है।

कई बार समझाने की कोशिश की पर नहीं माना

पिता ने कई बार बेटे के दोस्त को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। इधर, बेटा भी दोस्त (प्रेमी) के आकर्षण में बंधा होने से कोई बात सुनने को तैयार नहीं है। ऐसे में पिता ने भाई संस्था में गुहार लगाई है। पिता ने बताया कि बेटा कहता है कि दोस्त उसे बहुत प्यार करता है। उसके कहने पर हार्मोंस चेंज करने के इंजेक्शन लिए। संस्था ने लड़के के पिता को विधिक सहायता देने से पहले युवकों को बुलाकर मनोचिकित्सक से काउंसलिंग भी कराई।

कमरे में मिली फीमेल हार्मोंस की गोलियां

हार्मोंस थैरेपी ले रहे युवक की उम्र 19 साल है। चार बहनों के बाद अगस्त 2004 में उसका जन्म हुआ था। एक दिन बहन उसके कमरे की सफाई कर रही थी तो फीमेल हार्मोन्स की गोलियां पाई। भाई संस्था के जकी अहमद ने बताया कि युवक बीई फर्स्ट सेमेस्टर का छात्र है। कॉलेज में ही उसकी उसे गर्लफ्रेंड मानने वाले युवक से दोस्ती हुई। यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। वह उसे अपनी पिछले जन्म की प्रेमिका मानने लगा है।


महिला से पुरुष बनने के मुकाबले पुरुष से महिला बनना आसान होता है। यदि कोई पुरुष से महिला बनता है तो उसके शरीर के भागों से ही सर्जरी के जरिए महिलाओं के अंग बना दिए जाते हैं। इन्हें बनाने में करीब 4 घंटे का समय लगता है। वहीं ब्रेस्ट के लिए अलग से दो घंटे का ऑपरेशन होता है। ये दोनों ऑपरेशन तीन से चार महीने के अंतराल में किए जाते हैं। अगर कोई पूरी 18 प्रॉसेस फॉलो कर पूरी तरह से खुद में बदलाव चाहता है तो उसे ढाई से तीन साल देने होते हैं। इसमें खर्च भी बढ़ जाता है।



महिलाओं के मुकाबले पुरुष ज्यादा करवा रहे लिंग परिवर्तन, ऐसे लोग संतान को जन्म नहीं दे सकते


डॉ. दास के मुताबिक, इंदौर जैसे टियर टू शहर में भी अब काफी लोग लिंग परिवर्तन के लिए आ रहे हैं। इसमें अधिकतर पुरुष से महिला बनने वाले हैं। डॉ दास ही पिछले चार साल में 37 लिंग परिवर्तन के ऑपरेशन कर चुके हैं और कई अभी वेटिंग लिस्ट में हैं। उन्होंने बताया कि लिंग परिवर्तन में हार्मोन थैरेपी बहुत अहम होती है। इसके तहत ही पुरुष में महिला का और महिला में पुरुष का हार्मोन बॉडी में पहुंचाया जाता है। हालांकि लिंग परिवर्तन के बाद भी कोई पुरुष कभी बच्चे को जन्म नहीं दे सकता। हालांकि शादी करके शारीरिक संबंध जरूर बना सकता है।


लिंग परिवर्तन की प्रॉसेस सिर्फ प्लास्टिक सर्जन द्वारा ही पूरी नहीं की जाती, बल्कि इसमें मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, स्त्री रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट और वकील भी शामिल होते हैं। जो भी व्यक्ति लिंग परिवर्तन करवाता है, उससे कानूनी लिखा-पढ़ी करवाई जाती है, जिसमें वे खुद इस बात की अनुमति देता है कि वो लिंग परिवर्तन करवाना चाहता है। उसके अलावा व्यक्ति के परिवार की सहमति भी जरूरी होती है। मनोरोग विशेषज्ञ के अप्रूवल भी लगता है। इससे यह पता चल चलता है कि व्यक्ति को वाकई जेंडर डिस्फोरिया है और वह अपने मौजूदा लिंग के साथ सहज नहीं है।

 

दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट आरएम तिवारी ने बताया कि लिंग परिवर्तन को लेकर कानून में कोई प्रावधान नहीं है। बिना कानूनी प्रावधान के किसी का भी लिंग परिवर्तन करना अनैतिक और गलत है। मप्र हाईकोर्ट के एडवोकेट संजय मेहरा ने मुताबिक, लिंग परिवर्तन करने पर उसी के तहत व्यक्ति को पहचान पत्र भी जारी हो जाते हैं, जिन्हें सरकार मान्यता देती है। मेहरा कहते हैं कि, स्त्री से पुरुष बनने का मामला तो महाभारत में भी शिखंडी के रूप में देखने को मिलता है। हालांकि वे यह मानते हैं कि कानून में इसे लेकर कोई प्रावधान नहीं है।

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