राहुल गांधी की सांसदी समाप्त


 नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी को शुक्रवार को तगड़ा झटका लगा है। सूरत की कोर्ट से मिली दो साल की सजा के बाद लोकसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता रद कर दी है। इसके खिलाफ कांग्रेस देश भर में प्रदर्शन कर रही है। 

 दरअसल, सूरत कोर्ट ने मानहानि मामले में गुरुवार को राहुल गांधी को दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी। राहुल गांधी केरल के वायनाड से सांसद थे।  दरअसल, जनप्रतिनिधि कानून के मुताबिक अगर सांसदों और विधायकों को किसी भी मामले में 2 साल से ज्यादा की सजा हुई है, तो ऐसे में उनकी सदस्यता संसद और विधानसभा से रद्द हो जाएगी। इतना ही नहीं सजा की अवधि पूरी करने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी होते हैं।

मोदी सरनेम को लेकर दिया था बयान


राहुल गांधी ने कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली में कहा था, ”नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?” राहुल के इस बयान को लेकर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ धारा 499, 500 के तहत आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में बीजेपी विधायक ने आरोप लगाया था कि राहुल ने 2019 में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पूरे मोदी समुदाय को कथित रूप से यह कहकर बदनाम किया कि सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?


गुरुवार को सुनाई थी सजा


दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सूरत कोर्ट ने ‘मोदी सरनेम’ वाले बयान को लेकर दायर मानहानि के मामले में दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई। राहुल गांधी ने कर्नाटक में 2019 लोकसभा चुनाव से पहले ये बयान दिया था। कोर्ट ने राहुल को 15000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देते हुए सजा को 30 दिन के लिए सस्पेंड कर दिया। इस दौरान राहुल गांधी ऊपरी अदालत में सजा को चुनौती दे सकते हैं। कोर्ट ने अपने 170 पेज के फैसले में कहा है कि आरोपी खुद सांसद  हैं और सुप्रीम कोर्ट की सलाह के बाद भी आचरण में कोई बदलाव नहीं आया।

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