2 Jan को बेटी का जन्मदिन था। वह बहुत खुश थी। सुबह मुझसे फोन पर कहा था कि मम्मी मैं केक लेने जा रही हूं। दोस्तों के साथ बर्थडे मनाऊंगी। तभी रास्ते में 2 युवकों ने उसका रास्ता रोक लिया। जबर्दस्ती उसकी मांग में सिंदूर भर दिया। बेटी इतनी सहम गई कि उसने कीटनाशक पी लिया। खून की उल्टियां करने लगी। उसे अस्पताल ले गए, जहां उसने दम तोड़ दिया। ये दर्द उस मां का है, जिसकी 18 साल की बेटी ने सुसाइड कर लिया।
मां ने सिसकते हुए पूरी कहानी बताई...
मां ने बताया कि बेटी पढ़ने में बहुत अच्छी थी। 12th पास कर BA First yeaf में दाखिला लिया था। शहर में कमरा दिलाकर पढ़ाई करवा पाएं, इतनी हमारी हैसियत नहीं थी। हम चाहते थे कि उसे गांव ही बुला लें। ये बात जब उसके फूफा को पता चली, तो वह घर आए। कहा कि बिटिया हमारे साथ घर पर रह सकती है। इस बात से उसके चाचा भी राजी हो गए। उन्होंने भी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए हामी भर दी। बेटी का ईसागढ़ के एक college में admision हो गया। साथ ही, वह Computer कोर्स भी कर रही थी।
जन्मदिन के दिन लगाया मौत को गले
2 जनवरी को बेटी का जन्मदिन था। वह ईसागढ़ में ही थी। सुबह फोन पर बात हुई थी। वह बहुत खुश थी। बेटी ने कहा था कि केक काटकर कॉलेज की दोस्तों के साथ वह बर्थडे मनाएगी। अभी केक लेने जा रही है। सुबह 10 बजे बेटी दोस्त के साथ केक लेने ईसागढ के रेस्टोरेंट गई थी। यहां गांव का रहने वाले शिवेंद्र लोधी (20) और रोमेश लोधी (20) भी पहुंच गए। वे बेटी के साथ छेड़छाड़ करने लगे। मना किया तो रोमेश ने जबरदस्ती उसकी मांग में सिंदूर भर दिया। बेटी ने तुरंत फूफा को फोन कर पूरी बात बताई। फूफा पहुंच गए। वहां दोनों युवकों से उनकी हाथापाई भी हो गई। दोनों धमकी देकर भाग गए। बेटी लगातार रो रही थी।
घर पहुंचते ही कीटनाशक पी लिया
फूफा ने फोन पर हमें इसकी जानकारी दी। मैं अपने बेटे के साथ ईसागढ़ गई। बेटी की मांग सिंदूर से भरा था। वह रोते-रोते बस गांव आने की जिद कर रही थी। मैं अपने साथ बेटी को वापस गांव ले आई। घर पर मैंने उसे आराम करने के लिए कहा। मैं खेत पर चली गई। इसी दौरान, बेटी ने घर में रखी इल्ली मारने की दवा पी ली। थोड़ी देर बाद चाचा का बेटा उसके पास गया। बेटी ने उसे बताया कि मुझे अब जीना नहीं है।
भतीजे ने आकर मुझे ये बात बताई, तो मैं भागकर घर गई। बेटी खून की उल्टियां कर रही थी। मैं घबरा गई। उसे तुरंत रन्नौद स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। जहां से शिवपुरी रेफर कर दिया। शिवपुरी के एक निजी अस्पताल में दिखाने के बाद रात 12 बजे मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया। 3 जनवरी को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
10×10 के कच्चे कमरे में रहता है लड़की का परिवार
शिवपुरी के मायापुर के गांव का रहने वाली पीड़िता माता-पिता और भाई के साथ रहती थी। पिता 2 बीघा जमीन और मजदूरी के बलबूते एक दस बाई दस के मकान में रहकर परिवार पालता था। माता-पिता का सपना था कि वह बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कभी गरीबी को आड़े नहीं आने देंगे। यही वजह रही कि उन्होंने कभी भी बच्चों को पढ़ाई के लिए नहीं रोका। गांव से बाहर बेटी को पढ़ाई भेजा।
पढ़ाई छूटने के डर से छिपाया मामला
लड़की के परिजनों का कहना है कि उसने गांव के शिवेंद्र और रोमेश के बारे में कभी नहीं बताया था। हो सकता है कि वह लगातार छेड़छाड़ करते रहते हों। पढ़ाई छूटने और घर वापसी के डर से उसने नहीं बताया हो। मायापुर थाना प्रभारी पूनम सविता का कहना है कि लड़की की मौत मेडिकल कॉलेज में हुई है। सुसाइड का मामला दर्ज किया है। परिजनों के बयान लेने बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Source : Dainik Bhaskar


