आशापुर गांव में खुदाई के दौरान 4 साल पहले मिली थी यह प्रतिमा, परमार वंशीय प्रतिमा की चार भुजाएं हैं, जिनमें से 3 क्षतिग्रस्त
यह विशाल दस भुजाधारी गणेश प्रतिमा गंजबासौदा के निकट ग्राम सुनारी से बहने वाली कैवटन नदी से ग्रामीणों द्वारा निकाली गई थी.ऐसी कई अद्वितीय प्रतिमाएं ग्राम सुनारी में रखी हुई हैं।
एक शिला पर ही बनी है पूरी प्रतिमा
परमार वंशीय 11वीं-12वीं शताब्दी की दुर्लभ गणेश प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह प्रतिमा एक ही शिलापट पर बनी हुई है और संपूर्णता के स्वरूप में है। इस प्रतिमा की चार भुजाएं हैं, जो लाल बलुआ पत्थर पर बनी हुई है। इस प्रतिमा में श्री गणेश नृत्य करते हुए प्रसन्नचित मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं।
गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
Tags
वारल समाचार
